Main Aur Meri Awargi Lyrics - Nusrat Fateh Ali Khan

Main Aur Meri Awargi Lyrics - Nusrat Fateh Ali Khan

Main Aur Meri Awargi Lyrics By Nusrat Fateh Ali Khan

Main Aur Meri Awargi Lyrics By Nusrat Fateh Ali Khan जिसे Nusrat Fateh Ali Khan और उनकी Qawaal Party द्वारा गया गया है Main Aur Meri Awargi Hindi Ghazal  का Music Nusrat Fateh Ali Khan ने दिया है, और Main Aur Meri Awargi Ghazal Lyrics Nusrat Fateh Ali Khan ने लिखे है |

Main Aur Meri Awargi Lyrics - Nusrat Fateh Ali Khan

Main Aur Meri Awargi Lyrics - Nusrat Fateh Ali Khan

Song Title               :   Main Aur Meri Awargi
Singer                     :    Nusrat Fateh Ali Khan
Music                      :   Nusrat Fateh Ali Khan
Lyrics                      :   Nusrat Fateh Ali Khan
Languae                 :    Hindi


Main Aur Meri Awargi Ghazal Lyrics -

फिरते है कबसे दर-ब-दर अब इस नगर अब उस नगर इक दुसरे के हमसफ़र में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी ना आशना हर रह गुजर ना मेहरबा हर एक नज़र जाए तो अब जाए किधर में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी हम भी कभी आबाद थे ऐसे कहा बर्बाद थे हम भी कभी आबाद थे ऐसे कहा बर्बाद थे बेफिक्र थे आजाद थे मशरुर थे दिलशाद थे वो चाल ऐसी चल गया हम बुझ गए दिल जल गया निकले जला के अपना घर में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी वो माहवश वो माहरुह वो माहे कामिल हु-ब-हु वो माहवश वो माहरुह वो माहे कामिल हु-ब-हु थी जिसकी बाते कु-ब-कु उससे अजब थी गुफ्तगू फिर यूँ हुआ वो खो गई तो मुझको जिद सी हो गई लाएँगे उसको ढूंड कर में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी ये दिल ही था जो सह गया वो बात ऐसी कह गया ये दिल ही था जो सह गया वो बात ऐसी कह गया कहने को फिर क्या रह गया अश्कों का दरिया बह गया जब कहते वो दिल भर गया तेरे लिए में मर गया रोते है उसको रात भर में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी अब गम उठाए किस लिए आंसू बहाए किस लिए अब गम उठाए किस लिए आंसू बहाए किस लिए ये दिल जलाए किस लिए यूँ जां गवाए किस लिए ऐसा ना हो जिसका सिफन ढूंढेंगे अब ऐसा सजन होंगे कही तो कारगर में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी आसार है सब खोट के उनकान है सब चोट के आसार है सब खोट के उनकान है सब चोट के घर बंद है सब गोट के अब खत्म है सब टोटके किस्मत का सब फेयर है अंधेर है अंधेर है ऐसे हुए है बेअक्ल में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी जब हमदम-ओ-हमराज था तब ओर ही अंदाज था जब हमदम-ओ-हमराज था तब ओर ही अंदाज था अब सोज है तब साज था अब शर्म है तब नाज था अब मुझसे हो तो हो भी क्या है साथ वो तो वो भी क्या इक बेहुनर इक बेसमर में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी फिरते है कबसे दर-ब-दर अब इस नगर अब उस नगर इक दुसरे के हमसफ़र में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी में और मेरी आवारगी

Post a Comment

0 Comments